मित्रों हमारे हिंदू धर्म में जहां पति पत्नी पति-पत्नी को एक-दूसरे का पूरक समझा जाता है और उनके बीच संबंध को मजबूत करने के संदर्भ में बहुत सी मान्यताओं का उल्लेख किया गया है वहीं इसके विपरीत कुछ ऐसी मान्यताएं भी है जिसका जाने अनजाने में उल्लंघन भी पति पति-पत्नी के लिए बहुत से दुष्परिणामों का रूप ले सकता है जो कोई भी जीवन साथी नहीं चाहता होगा मित्रों आपने यह तो सुना ही होगा कि पति पति-पत्नी यदि एक ही थाली में भोजन करें तो उनके बीच प्यार का विस्तार होता है परंतु यह सत्य नहीं है हमारे हिंदू सनातन संस्कृति के अनुसार किसी भी पत्नी का अपने पति के साथ एक ही थाली में भोजन करना दरिद्रता की निशानी है यह जानकर आप भी हैरान हो गए होंगे कि ऐसा कैसे संभव है इसका क्या आधार है क्या वास्तव में किसी पत्नी को अपने पति के साथ एक ही थाली में भोजन करने की भूल नहीं करनी चाहिए और यदि हां तो इसके
क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं आपके सभी प्रश्नों का उत्तर मौजूद है हमारी आज की इस ब्लॉग में नमस्कार मित्रों आप का एक बार आपका एक बार फिर से आप जानते हैं हिंदू परिवारों में ऐसी बहुत सी चिड़िया है जो आज भी हमेशा साथ में ही भोजन करती है और कुछ परिवारों में तो ऐसा करने के लिए उनके बड़े बुजुर्गों द्वारा ही कहा जाता है और कभी-कभी यह भी देखने को मिलता है कि कुछ पति पत्नी साथ में भोजन तो करना चाहते हैं परंतु संगठित परिवार होने के कारण ऐसा नहीं कर पाते तो उन जोड़ियों के लिए जो कुछ प्रचलित मान्यताओं के कारण वश एक थाली में भोजन करने को खुशियों का स्रोत समझती हैं उन सभी के लिए वास्तव में पड़ने वाले प्रभाव को जान लेना आवश्यक है आवश्यक ता आवश्यकताओं की तो आपके मन में सबसे पहले आने वाली वस्तु निश्चित रूप से योगी जनता को जानते हुए हमारे सनातन धर्म में भोजन को भगवान की पूजा-अर्चना से जोड़ते हुए कई प्रचलित मान्यताओं का वर्णन किया है
अंतर्गत भोजन को भगवान का आशीर्वाद पूजा की जाती है और अन्य प्राप्ति के लिए ईश्वर का धन्यवाद किया जाता है मित्रों बातें ही खत्म नहीं होती सनातन धर्म में भोजन करने के संदर्भ में ऐसे बहुत से नियम कानून के बारे में बताया गया है जिसके पालन स्वरूप घर में सुख समृद्धि का वास होता है और इसके विपरीत यदि इन नियमों का पालन ना किया जाए तो इसकी अवहेलना घर में दरिद्रता का प्रवेश मानी जाती है ऐसी ही सनातन संस्कृति से जुड़ा एक नियम पति पत्नी के साथ भोजन करने से भी जुड़ा है वीडियो में किसी पत्नी का पति के साथ एक ही थाली में भोजन करना सनातन धर्म के अनुसार उचित है या नहीं धर्म की धर्म की मान्यताओं के खिलाफ है उसका क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं हिंदू परिवारों में भोजन से जुड़ी भावनाओं के साथ उसकी शुद्धता एवं सात्विकता का भी पूर्ण पालन किया जाता है लेकिन उसके बाद भोजन करते समय भी शास्त्रों में कुछ ऐसी बातें बताई गई है जिनका पालन करना प्रत्येक व्यक्ति को बहुत आवश्यक हो जाता है और यदि आप शास्त्रों में वर्णित इन नियमों का पालन नहीं
हैं तो आपके जीवन में बहुत परेशानी आ सकती है और आपको पता भी नहीं चलेगा कि किस कारण से आपके घर पर समस्याएं आ रही हैं क्योंकि आप सोचेंगे कि मैं कभी किसी से गलत नहीं बोलता और किसी भी व्यक्ति के साथ कुछ गलत करने की सोचता भी नहीं हूं मैं कभी झूठ भी नहीं बोलता बोलते व्रत का पालन करता हूं फिर भी मेरे साथ समस्याएं आ रही हैं तो अगर आप अपने जीवन में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो आप समझ सकेंगे कि आपके जीवन में परेशानियां क्यों आ रही है क्योंकि भोजन करते समय क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए और कैसे नहीं खाना चाहिए प्रत्येक विषय पर हिंदू सनातन से बता एं से बताया गया है हिंदू सनातन धर्म के अनुसार भोजन करते समय आपको टीवी नहीं देखना चाहिए किसी प्रकार का संगीत नहीं सुनना चाहिए और आप को भोजन करते समय बातचीत भी नहीं करनी चाहिए और भोजन करते समय बोलना भी नहीं चाहिए यदि आप नियम से भोजन करते हैं तो निश्चित रूप से
जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आएगी शास्त्रों के अनुसार किसी भी व्यक्ति का झूठा खाना भी बहुत बड़ा निषेध माना गया है आप भले ही भूखे हैं परंतु आपको किसी भी व्यक्ति का झूठा नहीं खाना चाहिए चाहे कोई भी व्यक्ति हो लेकिन हम सोच लेते हैं कि झूठा खाने से प्यार बढ़ता है लेकिन यह बातें लोगों को गुमराह करने वाली है और शास्त्रों के अनुकूल नहीं है आजकल पति पत्नी भी एक साथ एक थाली में भोजन करते हैं और ऐसा मान लेते हैं कि इससे दोनों के बीच प्यार बढ़ता है लेकिन ऐसा शास्त्रों के अनुसार अच्छा नहीं माना जाता है शास्त्रों के अनुसार पति-पत्नी को कभी भी एक साथ और एक ही थाली में भोजन नहीं करना चाहिए पति पत्नी को एक साथ एक थाली में भोजन करने से घर में दरिद्रता है है इसलिए हमेशा शास्त्रों के अनुसार ही भोजन करना चाहिए क्योंकि अगर आप शास्त्रों के नियम के अनुसार अपना जीवन जीते हैं तो निश्चित ही आपको जीवन में समस्याएं समस्या नहीं आएगी और
जीवन चिंता मुक्त होगा पति-पत्नी को पति पत्नी को एक साथ और एक थाली में भोजन करने से प्यार नहीं पड़ता यह केवल मात्र एक तांत्रिक प्रक्रिया है शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति की कुंडली में दूसरा भाव अपनी वाणी का होता है सुख का होता है कल है का होता है धन की बचत का होता है और जीवन में मिलने वाले सुखों को संबोधित करने का होता है अगर दूसरे भाव में व्यक्ति की वाणी और भाषा पर नकारात्मक प्रभाव होता है तो आपकी भाषा में कड़वाहट का भाव आता है और बहुत सारे दुष्प्रभाव आपके जीवन में देखने को मिलते हैं यदि हम किसी का झूठा खाते हैं तो हमारे जीवन में कई तरह के बुरे प्रभाव भी पढ़ते पड़ते हैं जैसे कि व्यक्ति के सुखों में कमी आती है घर परिवार में कलह बढ़ जाती है और भोग विलास में भी कमी आती है इतना ही नहीं हम जिस का झूठा खाते हैं उसके अशुभ विचार यदि वह व्यक्ति शुद्ध विचारों वाला है ऊपर
आपको प्यार दिखा रहा होता है और अंदर से बहुत ही काला है तो उसके अशुभ विचार हमारे मन में घर कर जाते हैं क्योंकि हम उस व्यक्ति का झूठा खा रहे होते हैं सा र हम ार असर हमारे क्षेत्र में होता है किसी का जूठा खाने से हमारे धन की हानि होने लगती है और किसी का जूठा खाने से हमारी जो धन एकत्रित करने की क्षमता होती है वह भी कम हो जाती है इससे जुड़े प्रसंग का वर्णन महाभारत काल में भी किया गया है जिसमें भीष्म पितामह ने अर्जुन को बताया है कि यदि कोई भाई भाई एक ही थाली में भोजन करें तुलसी अमृत के समान माना जाता है और इससे घर में धन थाने धन-धान्य स्वास्थ्य और लक्ष्मी वृद्धि होती है वहीं दूसरी तरफ भीष्म पितामह ने पति पत्नी पति-पत्नी के संदर्भ में बिलकुल ही विपरीत विचार रखते हुए बताया कि यदि कोई पति पत्नी एक ही थाली में भोजन करते हैं तो यह कृत्य निंदा के पात्र हैं और इसे शास्त्रों के अनुसार निश्चित बताया है और ऐसी
में चाहे कितने ही प्रकार के पकवान हो इसे मादक पदार्थों से भरी थाली के समान समझा गया है और भीष्म पितामह ने यह भी बताया कि हिंदू शास्त्रों के अनुसार एक स्त्री का उसके पति के भोजन करने के पश्चात भोजन करना ही उचित है घर में में ख समृद्धि समृद्धि का वास होता है

