मित्रों मृत्यु के बाद आपको स्वर्ग की प्राप्ति होगी या नरक की इस पर तो फिर किसी का वश नहीं है परंतु फिर भी आपको कुछ ऐसे कृतियों का पता चल जाए जो मरणासन्न व्यक्ति के स्वर्ग प्राप्ति का रास्ता बताता है तो निश्चित ही आप उसे जरूर जानना चाहेंगे तो मित्रो गरुड़ पुराण के नौवें अध्याय में ऐसे ही कुछ खुशियों का वर्णन मिलता है जो मरते हुए व्यक्ति के स्वर्ग जाने की संभावना को एक सीमा तक निश्चित करता है आइए जानते हैं उन्हीं कृतियों के बारे में आज की खास वीडियो में नमस्कार मित्रों स्वागत है आपका ाण में में महा पुराणों में से एक गरुड़ पुराण में जहां एक और मृत्यु का रहस्य छिपा है तो दूसरी ओर जीवन को लेकर कई गुण बातों का वर्णन भी किया गया है उन्हीं में से एक रहस्य मनुष्य के मरने से पहले ही स्वर्ग जाने की तैयारी से भी जुड़ा है गरुड़ पुराण के नौवें अध्याय में वर्ण अनुसार जब
अपना शरीर छोड़ने लगता है तो उस समय तुलसी के समीप गोबर से एक मंडल की रचना करनी चाहिए उसके बाद उस मंडल के ऊपर तेल बिखेर कर खुशियों को बिछाए तत्पश्चात उनके ऊपर श्वेत वस्त्र के के आसन कर आसन कर भगवान विष्णु के स्वरूप स्वरुप शालिग्राम शिला को स्थापित करें और यह तो स्वाभाविक सी बात है जहां पाप पाप दोष और भय को हरण करने वाली शीला विद्यमान है उसके समीप में मरने वाले प्राणी को मुक्ति मिलना निश्चित है इसके साथ ही गरुड़ पुराण में तुलसी के पौधे की महत्ता को भी कुछ इस प्रकार बताया गया है जहां जगत किताब का ी वृक्ष वृक्ष की छाया है वह मरने से सदैव मुक्ति ही प्राप्त होती है जिस मुक्ति का दान आदि कर्मों से भी प्राप्त होना दुर्लभ होता है
जिस घर में तुलसी वृक्ष के लिए स्थान बना हुआ है वह घर तीर्थ स्वरूप ही है वहां यम के दूत प्रवेश नहीं करते तुलसी की मंजरी से युक्त होकर जो प्राणी अपने प्राणों का परित्याग
है वह सैकड़ों पापों से युक्त हो तो भी यमराज उसे देख नहीं सकते तुलसी के पत्ते को मुख में रखकर तिल और कुछ कुश के आसन पर मरने वाला व्यक्ति पुत्र ही ना हो तो भी निसंदेह विष्णुपुर को जाता है कहा जाता है तीनों प्रकार के तेल काले सफेद और बुरे भूरे कुछ और तुलसी यह सब मृत प्राणी को दुर्गति से बचा लेते हैं साथ ही मित्र भगवान विष्णु दिल को अपने से जोड़ते हुए कहते हैं मेरे पसीने से तेल पैदा हुए हैं अतः वे पवित्र हैं जिस कारण असुर दानव और जा ते हैं जाते हैं यही नहीं भगवान विष्णु ने तो कुछ को भी अपने से कुछ इस प्रकार जुड़ा हुआ बताया है हे गरुड़ मेरे रूम से पैदा हुए कुछ मेरी विभूति है इसलिए उनके स्पर्श से ही मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है उसके मूल में ब्रह्मा ब्रह्मा कुश के मध्य में जनार्दन और कुश के अग्रभाग में अग्र भाग में स्थित है इस प्रकार तीनों देवता कुछ में निवास करते हैं इसलिए ऐसी मान्यता है कि कुछ अग्नि मंत्र तुलसी ब्राह्मण और गांव यह बार-बार
किए जाने पर भी निर्माण अर्थात अपवित्र नहीं होते वहीं दूसरी ओर और पिंडदान में उपयोग किए गए धर्मप्रीत के निमित्त भोजन करने वाले ब्राह्मण नीच के मुख से उच्चारित मंत्र नीच संबंधी गाय और तुलसी तथा चीता चिता की आग इन सबको निर्माण में बताया है ने बताया है गरुड़ पुराण के अनुसार गोबर से लिपी हुई कुछ बिछाकर संस्कार की हुई पृथ्वी पर मरणासन्न व्यक्ति को जितना हो सके अंतरिक्ष का प्रयास करना चाहिए अर्थात मरते हुए व्यक्ति को चौकी आदि पर नहीं रखना चाहिए ब्रह्मा विष्णु रुद्र तथा अन्य सभी देवता और अग्नि यह सभी मंडल पर विराजमान रहते हैं इसलिए मंडल की रचना करनी चाहिए जो भूमि लिए प्रेरित होती है अर्थात मल मूत्र आदि से रहे थे रहे थे वह सर्वत्र पवित्र होती है किंतु जो भूमि भाग कभी लिखा जा चुका है या मल मूत्र आदि से दूषित है वह पुनः अपने पर उसकी शुद्धि हो जाती है माना जाता है बिना लिपि हुई भूमि पर और चारपाई आदि पर या आकाश में राक्षस भूत प्रेत और यमदूत प्रविष्ट हो जाते हैं इसलिए भूमि पर मंडल बनाए बिना
रात अग्निहोत्री ब्राह्मण भोजन देव पूजन और मरणासन्न व्यक्ति का स्थापन नहीं करना चाहिए लिए लिप ी डीपी हुई भूमि पर आतुर व्यक्ति को लिटा कर उसके मुख में स्वर्ण और रत्न का प्रक्षेप करके सालग रामस्वरूप जी भगवान विष्णु का चरणामृत देना चाहिए गरुड़ पुराण के अनुसार जो शालिग्राम शिला के जल को बिंदु मात्र भी पीता है वह सभी पापों से मुक्त होकर सीधे बैकुंठ लोक में जाता है इसलिए अतुल व्यक्ति को उसके बड़े से बड़े पापों को गंगा जल का पान सभी तीर्थों में किए जाने वाले स्नान दान आदि के समान पुण्य रूपी फल को प्रदान करने वाला है इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं जो मनुष्य शरीर को शुद्ध करने वाले चांद्रायण व्रत को एक हजार बार करता है और जो मनुष्य एक बार गंगा जल का पान करता है दोनों ही एक समान फल देने वाले हैं भगवान विष्णु गंगा की महत्ता को कुछ इस प्रकार कहते हैं हे गरुड़ अग्नि के संबंध से जैसे रुई की राशि नष्ट हो जाती है उसी
गंगाजल के संपर्क में आने से सभी पाप जलकर राख हो जाते हैं जो सूर्य की किरणों से संतप्त गंगा के जल का पान करता है वह सभी युवाओं से छूट छूटकर हरि के धाम को प्राप्त होता है अन्य नदियां मनुष्यों को स्नान करने पर पवित्र करती है किंतु गंगा जी के तो दर्शन स्पर्श दान सभी पवित्र करने वाले हैं यही नहीं गंगा नाम का कीर्तन करने मात्र से सैकड़ों भी पअप भी पवित्र हो जाते हैं इसलिए संसार से पार लगा देने वाले गंगाजल को पीना चाहिए जो व्यक्ति प्राणों की प्राण हकीकत होने पर गंगा गंगा ऐसा उच्चारण करता है वह विष्णु लोक को प्राप्त होता है और पुनः ब्लॉक में चैन नहीं लेता प्राणों की निकलने के समय जो पुरुष श्रद्धा युक्त होकर मन से गंगा का चिंतन करता है वह भी परम गति को प्राप्त होता है अतः गंगा का ध्यान गंगा को नमन गंगा का सम्मान करना चाहिए और गंगा जल का पान भी करना ही ही इसके पक्ष ात पश्चात मोक्ष प्रदान करने वाली श्रीमद्भागवत गीता के 1 श्लोक आधे श्लोक या एक पाठ का भी
करने वाला व्यक्ति ब्रह्म लोक को प्राप्त होकर पुनः इस संसार में कभी नहीं आता गरुड़ पुराण के अनुसार ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य को मरण काल में वेद और उपनिषदों का पाठ और शिव व विष्णु की स्तुति से मुक्ति प्राप्त होती है यह भी बताया गया है कि प्राण त्याग के समय मनुष्य को अनशन व्रत रखना चाहिए और यदि वक्त जन्मा हो तो उसे आतुर सन्यास लेना चाहिए आपको बता दें सांसारिक जीवन से दुखी होने की दशा में जल्दी से ग्रहण किया गया सन्यास सन्या सन्या कहलाता है कहा जाता है कि कंठ में आने पर जो प्राणी मैंने सन्यास ले लिया है ऐसा कहता है वह मरने पर विष्णु लोक को प्राप्त होता है पुनः पृथ्वी पर उसका जन्म नहीं होता इस प्रकार जिस धार्मिक रोज की मृत्यु से पूर्व बताए गए सभी कार्य संपादित के प्राण प्राण ऊपर के क्षेत्रों से सुख पूर्वक निकलते हैं माना जाता है शरीर त्यागने का यह सबसे उचित मार्ग है जिससे मृतकों मोक्ष की प्राप्ति होती है ी के साथ के साथ गरुड़ पुराण में उन मार्गों का भी वर्णन किया
है जहां से मनुष्य के प्राण निकलते हैं दोनों ने दोनों नासिका बंद दोनों कान यह सब दुआ है इनमें से किसी द्वार से पुण्यात्मा के प्राण निकलते हैं इनमें से आत्मा किस मार्ग का चयन करती है यह आपके कर्म पर आधारित है तो मित्र उम्मीद करते हैं आप को मरते हुए व्यक्ति के स्वर्ग प्राप्ति की विधि समझ आ गई होगी आपको हमारी आज की वीडियो कैसी लगी नीचे कमेंट करके जरूर बताएं लाइक करें शेयर करें और आज के लिए इतना ही बहुत-बहुत शुक्रिया बहुत-बहुत शुक्रिया

